এই-মত রঙ্গ করে বৈকুণ্ঠের রায
কে তাঙ্রে জানিতে পারে, যদি না জানায
एइ-मत रङ्ग करे वैकुण्ठेर राय
के ताङ्रे जानिते पारे, यदि ना जानाय
अनुवाद
इस प्रकार वैकुण्ठ के स्वामी ने अद्भुत लीलाएँ कीं। जब तक भगवान स्वयं उन्हें प्रकट न करें, उन्हें कौन समझ सकता है?
Thus the Lord of Vaikuntha performed wonderful pastimes. Unless the Lord Himself reveals them, who can understand them?
तात्पर्य
शब्द "रंग" का अर्थ "शगल करने का आनंद" होता है। इस पद की दूसरी पंक्ति के विवरण के लिए, कोई श्रीमद भागवतम् (10.14.29) में भगवान ब्रह्मा की प्रार्थनाओं को संदर्भित कर सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥