श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  1.4.120 
সবে সর্ব-ভাবে লৈলা গোবিন্দ-শরণ
প্রভু লঞা যায চোর আপন-ভবন
सबे सर्व-भावे लैला गोविन्द-शरण
प्रभु लञा याय चोर आपन-भवन
 
 
अनुवाद
जब चोर भगवान गोविंद को अपने घर की ओर ले जा रहे थे तो सभी ने उनकी शरण ली।
 
When the thieves were taking Lord Govind towards their house, everyone took shelter in him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)