श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  1.4.118 
কেহ কেহ বোলে,—“আইস, আইস, বিশ্বম্ভর”
কেহ ডাকে ’নিমাই’ করিযা উচ্চ-স্বর
केह केह बोले,—“आइस, आइस, विश्वम्भर”
केह डाके ’निमाइ’ करिया उच्च-स्वर
 
 
अनुवाद
किसी ने पुकारा, “आओ, विश्वम्भर, आओ!” किसी ने ऊँची आवाज़ में पुकारा, “निमाई!”
 
Someone called out, “Come, Vishvambhar, come!” Someone called out loudly, “Nimai!”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)