श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  1.4.112 
আথে-ব্যথে কোলে করি’ দুই চোরে ধায
লোকে বোলে,—“যার শিশু সে-ই লৈ’ যায
आथे-व्यथे कोले करि’ दुइ चोरे धाय
लोके बोले,—“यार शिशु से-इ लै’ याय
 
 
अनुवाद
दोनों चोर जल्दी से भगवान को ले गए, जबकि देखने वालों को लगा कि वे अपने ही बेटे को घर ले जा रहे हैं।
 
The two thieves quickly took the Lord away, while the onlookers thought they were taking their own son home.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)