श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.4.11 
কোন দেব অলক্ষিতে গৃহেতে সাম্ভায
ছাযা দেখি’ সবে বোলে,—’এই চোর যায’
कोन देव अलक्षिते गृहेते साम्भाय
छाया देखि’ सबे बोले,—’एइ चोर याय’
 
 
अनुवाद
उनमें से एक चुपके से यहोवा के घर में घुस गया, और जब लोगों ने उसकी छाया देखी, तो वे चिल्ला उठे, “वहाँ एक चोर जा रहा है!”
 
One of them sneaked into the Lord's house, and when the people saw his shadow, they shouted, "There goes a thief!"
तात्पर्य
शब्द "साम्भाया" का अर्थ है "प्रवेश करना"।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)