श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  1.4.105 
দেখিযা শিশুর বুদ্ধি, সবেই বিস্মিত
রুষ্ট নহে কেহ, সবে করেন পিরীত
देखिया शिशुर बुद्धि, सबेइ विस्मित
रुष्ट नहे केह, सबे करेन पिरीत
 
 
अनुवाद
बालक की बुद्धिमत्ता देखकर सभी आश्चर्यचकित हो गए। वे परेशान नहीं हुए, बल्कि उससे प्रेम करने लगे।
 
Everyone was astonished by the child's intelligence. They were not upset, but rather grew fond of him.
तात्पर्य
शब्द पीरिता का मतलब है "प्यार"।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)