श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  1.4.103 
দৈব-যোগে যদি কেহ পারে ধরিবারে
তবে তার পা’যে ধরী করে পরিহারে
दैव-योगे यदि केह पारे धरिबारे
तबे तार पा’ये धरी करे परिहारे
 
 
अनुवाद
यदि संयोगवश भगवान पकड़े जाते तो वे उस व्यक्ति के चरणों में गिरकर उसे मुक्त कर देते थे।
 
If by chance the Lord was caught, he would fall at the feet of that person and free him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)