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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना
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श्लोक 100
श्लोक
1.4.100
নিকটে বসযে যত বন্ধু-বর্গ-ঘরে
প্রতি-দিন কৌতুকে আপনে চুরি করে
निकटे वसये यत बन्धु-वर्ग-घरे
प्रति-दिन कौतुके आपने चुरि करे
अनुवाद
वह नियमित रूप से पड़ोसी दोस्तों के घर जाता था और खेल-खेल में चीजें चुरा लेता था।
He would regularly visit the homes of neighboring friends and steal things playfully.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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