श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान के कुंडली की गणना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.3.7 
কি বিধি করিব ইহা, কিছুই না স্ফুরে
আস্তে-ব্যস্তে নারী-গণ ’জয-জয’ ফুকারে
कि विधि करिब इहा, किछुइ ना स्फुरे
आस्ते-व्यस्ते नारी-गण ’जय-जय’ फुकारे
 
 
अनुवाद
वे इतने अभिभूत थे कि उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। वहाँ मौजूद महिलाएँ उत्साहित होकर बस चिल्ला उठीं, "जय! जय!"
 
They were so overwhelmed that they didn't know what to do. The women present there just shouted in excitement, "Jai! Jai!"
तात्पर्य
सभी एकत्रित महिलाएँ पूरी तरह से विचलित हो गई थीं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)