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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 3: भगवान के कुंडली की गणना
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श्लोक 6
श्लोक
1.3.6
শচী-জগন্নাথ দেখি’ পুত্রের শ্রী-মুখ
দুই-জন হৈলেন আনন্দ-স্বরূপ
शची-जगन्नाथ देखि’ पुत्रेर श्री-मुख
दुइ-जन हैलेन आनन्द-स्वरूप
अनुवाद
अपने पुत्र का मुख देखकर शची और जगन्नाथ आनंद से भर गये।
Sachi and Jagannatha were filled with joy after seeing their son's face.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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