श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान के कुंडली की गणना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  1.3.42 
জন্ম-যাত্রা-মহোত্সব, নিশায গ্রহণে
আনন্দে করেন, কেহ মর্ম নাহি জানে
जन्म-यात्रा-महोत्सव, निशाय ग्रहणे
आनन्दे करेन, केह मर्म नाहि जाने
 
 
अनुवाद
सभी लोग भगवान के प्रकट होने का उत्सव मनाते हुए यह सोच रहे थे कि वे ग्रहण का उत्सव मना रहे हैं।
 
Everyone was celebrating the appearance of God thinking they were celebrating an eclipse.
तात्पर्य
उस रात चंद्र ग्रहण होने की वजह से कई लोग अनजाने में महाप्रभु के आविर्भाव का उत्सव मना रहे थे। हालाँकि यह उत्सव चंद्र ग्रहण के कारण मनाया जा रहा था, पर वास्तव में ये उत्सव प्रभु के आविर्भाव के लिए थे, लेकिन आम लोग इस सच्चाई को समझ नहीं पाए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)