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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 3: भगवान के कुंडली की गणना
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श्लोक 39
श्लोक
1.3.39
কিবা আনন্দ হৈল সে জগন্নাথ-ঘরে
বেদেতে অনন্তে তাহা বর্ণিতে না পারে
किबा आनन्द हैल से जगन्नाथ-घरे
वेदेते अनन्ते ताहा वर्णिते ना पारे
अनुवाद
जगन्नाथ मिश्र के घर में जो सुख था, उसका वर्णन न तो भगवान अनंत कर सकते थे और न ही वेद।
Neither Lord Anant nor the Vedas could describe the happiness that existed in Jagannatha Mishra's house.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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