उस समय विभिन्न संगीतकार आये और उत्साहपूर्वक मृदंग, सानी और बांसुरी बजाने लगे।
At that time various musicians came and started playing Mridang, Sani and Flute enthusiastically.
तात्पर्य
मृदंग एक मिट्टी का, आयताकार ढोल होता है जिसके बाएँ और दाएँ छोर खुले होते हैं और चमड़े से ढंके होते हैं, जिसे कोकम से लिपटा हुआ होता है और चमड़े की पट्टियों से आपस में जुड़ा हुआ होता है। यह संकीर्तन में प्रयुक्त होने वाला एक प्रसिद्ध वाद्य है। स्वामी के प्रकट होने के समय भी मृदंग का उपयोग प्रचलित था। सानई एक पीतल का वाद्य है जिसमे छेद होते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥