vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 1: आदि-खण्ड
»
अध्याय 3: भगवान के कुंडली की गणना
»
श्लोक 32
श्लोक
1.3.32
দিব্য-কোষ্ঠী শুনি’ যত বান্ধব সকল
জয-জয দিযা সবে করেন মঙ্গল
दिव्य-कोष्ठी शुनि’ यत बान्धव सकल
जय-जय दिया सबे करेन मङ्गल
अनुवाद
भगवान की असाधारण कुंडली सुनकर, वहाँ उपस्थित मित्र और सम्बन्धी प्रसन्नतापूर्वक “जय! जय!” कहने लगे।
Hearing the extraordinary horoscope of the Lord, the friends and relatives present there started shouting joyfully, “Jai! Jai!”
तात्पर्य
"दिव्य-कौष्ठी" शब्द ईश्वरीय व्यक्तित्व की जन्मकुण्डली को इंगित करता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×