श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान के कुंडली की गणना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.3.31 
সেহ বিপ্র কান্দে জগন্নাথ-পা’যে ধরি’
আনন্দে সকল-লোক বলে ’হরি’ ’হরি’
सेह विप्र कान्दे जगन्नाथ-पा’ये धरि’
आनन्दे सकल-लोक बले ’हरि’ ’हरि’
 
 
अनुवाद
तब ब्राह्मण ने जगन्नाथ मिश्र के पैर पकड़ लिए और रोने लगा, जबकि वहां उपस्थित लोग आनंद में “हरि! हरि!” का जाप करने लगे।
 
The Brahmin then caught hold of Jagannatha Mishra's feet and began to cry, while those present there began to chant "Hari! Hari!" in joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)