হেন-মতে প্রভুর হৈল অবতার
আগে হরি-সঙ্কীর্তন করিযা প্রচার
চতুর্-দিকে ধায লোক গ্রহণ দেখিযা
গঙ্গা-স্নানে ’হরি’ বলি’ যাযেন ধাইযা
যার মুখ জন্মেহ না বলে হরি-নাম
সেহ ’হরি’ বলি’ ধায, করি’ গঙ্গা-স্নান
দশ-দিক্ পূর্ণ হৈল, উঠে হরি-ধ্বনি
অবতীর্ণ হৈযা হাসেন দ্বিজ-মণি
हेन-मते प्रभुर हैल अवतार
आगे हरि-सङ्कीर्तन करिया प्रचार
चतुर्-दिके धाय लोक ग्रहण देखिया
गङ्गा-स्नाने ’हरि’ बलि’ यायेन धाइया
यार मुख जन्मेह ना बले हरि-नाम
सेह ’हरि’ बलि’ धाय, करि’ गङ्गा-स्नान
दश-दिक् पूर्ण हैल, उठे हरि-ध्वनि
अवतीर्ण हैया हासेन द्विज-मणि
अनुवाद
इस प्रकार, भगवान गौरांग ने सर्वप्रथम संकीर्तन आंदोलन का सूत्रपात किया। चारों ओर से लोग हरि नाम का जप करते हुए गंगा स्नान के लिए गए। यहाँ तक कि जिन लोगों ने जीवन में कभी हरि नाम का जप नहीं किया, वे भी गंगा स्नान के लिए दौड़ते हुए हरि नाम का जप करने लगे। हरि नाम की ध्वनि दसों दिशाओं में गूंज उठी। ब्राह्मणों में श्रेष्ठ भगवान, मुख पर मुस्कान लिए प्रकट हुए।
Thus, Lord Gauranga initiated the first sankirtana movement. People from all over went to bathe in the Ganges, chanting the name Hari. Even those who had never chanted Hari before began chanting it as they ran to bathe in the Ganges. The sound of Hari's name reverberated in all ten directions. The Lord, the best of brahmins, appeared with a smile on his face.
तात्पर्य
हरी नाम के उदात्त आगमन पर, जो कि श्री कृष्ण संकीर्तन के व्यक्तीकरण भगवान गौरासुंदर का अवतार है, उनके नामों के मंत्रोच्चारों की उग्र ध्वनि यह संकेत देती है कि वह भविष्य में भक्तिपूर्ण पवित्र नामों के मंत्रोच्चार की प्रक्रिया का प्रचार करेंगे, और इस युग के धार्मिक सिद्धांतों को बनाए रखेंगे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥