श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान के कुंडली की गणना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.3.14 
বৃহস্পতি জিনিযা হৈবে বিদ্যাবান্
অল্পেই হৈবে সর্ব-গুণের নিধান”
बृहस्पति जिनिया हैबे विद्यावान्
अल्पेइ हैबे सर्व-गुणेर निधान”
 
 
अनुवाद
"यह बालक बृहस्पति से भी अधिक विद्वान होगा। वह शीघ्र ही सभी सद्गुणों का भंडार प्रकट करेगा।"
 
"This child will be more learned than Brihaspati. He will soon manifest a storehouse of all virtues."
तात्पर्य
बृहस्पति स्वर्गीय ग्रहों में सबसे अधिक विद्वान् व्यक्तित्व हैं। महाप्रभु भौतिक ज्ञान के बजाय आध्यात्मिक ज्ञान में बृहस्पति को पार कर गए। दूसरे शब्दों में, बृहस्पति के अवतार भौतिक ज्ञान सर्वभौम भट्टाचार्य की प्राप्त ब्राह्मण ज्ञान भगवान द्वारा जीता गया, जैसे सूर्य के उदय होने से अन्धकार जीत जाता है। इस तरह भगवान भगवान कृष्ण की सेवा के रूप में उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान से प्रबुद्ध करेंगे। जो श्रीमान महाप्रभु को कठिन परिश्रम के व्यक्ति के रूप में ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास का प्रयास नहीं करना है, क्योंकि वह सभी शुभ गुणों के सागर हैं। इसलिए ज्ञान के सभी क्षेत्रों में वह थोड़े से बहाने पर पूर्ण प्रभुत्व प्रदर्शित करेंगे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)