शंखे तैले तथा माँसे वैद्ये ज्योतिषिके द्विजे
यात्रायां पथि निद्रायां महच्छब्दो न दीयते
"यदि कोई महँ उपसर्ग जोड़ता है शंख (शंख), तैल (तेल), मांस (मांस), वैद्य (डॉक्टर), ज्योतिष (ज्योतिषी), ब्राह्मण, यात्रा (यात्रा), पथ (मार्ग), और निद्रा (नींद) यह एक विपरीत अर्थ उत्पन्न करेगा। इसलिए इन शब्दों में महा नहीं जोड़ना चाहिए। "लेकिन इस मामले में यह समझा जाना चाहिए कि नीलाम्बर चक्रवर्ती विद्वान थे और ज्योतिष विज्ञान में विशेषज्ञ थे। महा-ज्योति-विद शब्द उस व्यक्ति को भी इंगित कर सकता है जो आध्यात्मिक विज्ञान में विद्वान और विशेषज्ञ है।
