श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  1.2.97 
সর্ব-কাল চারি ভাই গায কৃষ্ণ-নাম
ত্রি-কাল করযে কৃষ্ণ-পূজা, গঙ্গা-স্নান
सर्व-काल चारि भाइ गाय कृष्ण-नाम
त्रि-काल करये कृष्ण-पूजा, गङ्गा-स्नान
 
 
अनुवाद
श्रीवास पंडित और उनके तीनों भाई निरंतर कृष्ण के नामों का जाप करते थे। वे प्रतिदिन तीन बार गंगा स्नान करते और फिर भगवान कृष्ण की पूजा करते थे।
 
Srivasa Pandita and his three brothers constantly chanted the names of Krishna. They bathed in the Ganges three times daily and then worshipped Lord Krishna.
तात्पर्य
शब्द 'चारी भाई' श्रीवास, श्रीराम, श्रीपति और श्रीनिधि को संदर्भित करते हैं। शब्द 'कृष्ण-नाम गाया' हरे कृष्ण महा-मंत्र के जप को संदर्भित करता है। शब्द 'त्रि-काल' का अर्थ है "सुबह, दोपहर और शाम।" शब्द 'गंगा-स्नान' गंगा में स्नान करने को संदर्भित करता है, जो श्री कृष्ण के चरणों से निकला अमृत है, जो हृदय में जमा गंदगी को साफ करने या पवित्रता और अपवित्रता को जमा करने की प्रवृत्ति को छोड़ने के लिए है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)