श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  1.2.95 
’অদ্বৈতের কারণে চৈতন্য অবতার’
সেই প্রভু কহিযাছেন বার-বার
’अद्वैतेर कारणे चैतन्य अवतार’
सेइ प्रभु कहियाछेन बार-बार
 
 
अनुवाद
भगवान चैतन्य ने बार-बार पुष्टि की है कि उन्होंने श्री अद्वैत प्रभु की इच्छा के कारण अवतार लिया।
 
Lord Chaitanya has repeatedly confirmed that He incarnated due to the will of Sri Advaita Prabhu.
तात्पर्य
इसमें केवल श्री अद्वैत प्रभु के आंतरिक प्रयास से ही हुआ कि श्री चैतन्यदेव ने भक्तिपूर्ण सेवा के रूप में जीवों के हृदय में शुद्ध बुद्धि को जगाया जो भौतिक इंद्रियों की संतुष्टि में लिप्त थे। इस तरह हर कोई लाभान्वित हुआ। यह बार-बार श्री गौरंग महाप्रभु स्वयं बयान करते थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)