श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  1.2.94 
নিরবধি এই-মত সঙ্কল্প করিযা
সেবেন শ্রী-কৃষ্ণ-পদ এক-চিত্ত হৈযা
निरवधि एइ-मत सङ्कल्प करिया
सेवेन श्री-कृष्ण-पद एक-चित्त हैया
 
 
अनुवाद
इस निश्चय के साथ, अद्वैत आचार्य ने निरंतर स्थिर मन से श्री कृष्णचन्द्र के चरणकमलों की सेवा की।
 
With this determination, Advaita Acharya continuously served the lotus feet of Sri Krishnachandra with a steady mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)