श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  1.2.92 
তবে ত’ ’অদ্বৈত সিṁহ’ আমার বডাই
বৈকুণ্ঠ-বল্লভ যদি দেখাঞ হেথাই
तबे त’ ’अद्वैत सिꣳह’ आमार बडाइ
वैकुण्ठ-वल्लभ यदि देखाञ हेथाइ
 
 
अनुवाद
“मेरा नाम, ‘अद्वैत सिंह’, तब उचित होगा जब मैं वैकुंठ के प्रिय भगवान का अवतरण करूँगा।
 
“My name, ‘Advaita Singh’, will be appropriate when I incarnate as the beloved Lord of Vaikuntha.
तात्पर्य
कृपा सिंधु श्री आदवैत प्रभु कहने लगे, यदि मैं वैकुंठ के भगवान को इस भौतिक संसार में प्रकट कर पाऊँ और लोगों में उनकी कृपा बाँट पाऊँ, तो भले ही मैं विष्णु से अभिन्न हूँ, तब भी वैष्णवाचार्य के रूप में मेरी श्रेष्ठतम उपाधि उचित होगी और मेरा हर्ष और अधिक बढ़ेगा।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)