কৃষ্ণ-শূন্য মঙ্গলে দেবের নাহি সুখ
বিশেষ অদ্বৈত মনে পায বড দুঃখ
कृष्ण-शून्य मङ्गले देवेर नाहि सुख
विशेष अद्वैत मने पाय बड दुःख
अनुवाद
अद्वैत आचार्य के नेतृत्व में भक्तगण यह देखकर व्यथित थे कि लोग ऐसे तथाकथित शुभ कार्यों में लगे हुए थे जिनका कृष्ण से कोई संबंध नहीं था।
The devotees, led by Advaita Acharya, were distressed to see that people were engaged in so-called auspicious activities that had no connection with Krishna.
तात्पर्य
देवता उन कथित शुभकामनाओं से प्रसन्न नहीं होते जो कृष्ण से संबंधित नहीं होती हैं। देवता भगवान विष्णु के भक्त हैं, और विष्णु के शुद्ध भक्ति से वंचित मनुष्यों को राक्षस कहा जाता है। कृष्ण से संबंधित न होने वाली क्षणभंगुर अस्थायी शुभकामनाएं राक्षसों की स्वार्थी मानसिकता के लिए उपयुक्त हैं, लेकिन ऐसे आदर्श केवल अस्थायी रूप से लाभकारी हो सकते हैं, स्थायी रूप से नहीं। अविश्वासियों को अस्थायी रूप से निर्मित शुभकामनाओं के लिए प्रयास करते देखकर, नवद्वीप के शुद्ध भक्त, विशेष रूप से श्री अद्वैत प्रभु व्यथित थे प्रसन्न नहीं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥