श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  1.2.86 
সকল সṁসার মত্ত ব্যবহার-রসে
কৃষ্ণ-পূজা, কৃষ্ণ-ভক্তি কারো নাহি বাসে
सकल सꣳसार मत्त व्यवहार-रसे
कृष्ण-पूजा, कृष्ण-भक्ति कारो नाहि वासे
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण विश्व में सभी लोग भौतिकवादी गतिविधियों में लगे हुए थे; कोई भी कृष्ण की पूजा या सेवा में संलग्न नहीं था।
 
All over the world, people were engaged in materialistic activities; no one was engaged in the worship or service of Krishna.
तात्पर्य
चाहे विद्वान, मूर्ख, बालक, वृद्ध या नारी, उस समय नवद्वीप में हर कोई पंच प्रकार के इन्द्रिय सुखों में लिप्त था। उनमें से किसी के भी इन्द्रियों को पूज्यनीय प्रभु कृष्ण की निरंतर सेवा करने का कोई चाव नहीं था। लोगों की रूचियाँ इतनी विकृत हो गई थीं, कि वे केवल नारायण की पूजा के लिये कोई रुझान रखे बिना सांसारिक क्रिया-कलापों में रुचि रखते थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)