श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  1.2.85 
এই-মত অদ্বৈত বৈসেন নদীযায
ভক্তি-যোগ-শূন্য লোক দেখি’ দুঃখ পায
एइ-मत अद्वैत वैसेन नदीयाय
भक्ति-योग-शून्य लोक देखि’ दुःख पाय
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अद्वैत आचार्य लोगों की भक्ति की कमी के कारण बड़े कष्ट में नादिया में रहने लगे।
 
Thus Advaita Acharya started living in Nadia in great distress due to lack of devotion of the people.
तात्पर्य
भौतिकवादी व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के लिए, श्री अद्वैत प्रभु ने मायापूर में निवास करते हुए कृष्ण की पूजा करने के मनोरंजन का प्रदर्शन किया। हरि के विरोधी लोगों की दयनीय स्थिति ने उनके हृदय को अत्यधिक पीड़ा दी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)