হুঙ্কার করযে কৃষ্ণ-আবেশের তেজে
যে ধ্বনি ব্রহ্মাণ্ড ভেদি’ বৈকুণ্ঠেতে বাজে
हुङ्कार करये कृष्ण-आवेशेर तेजे
ये ध्वनि ब्रह्माण्ड भेदि’ वैकुण्ठेते बाजे
अनुवाद
उन्होंने परम आध्यात्मिक आनंद में ऊँचे स्वर में कृष्ण को पुकारा। वह ध्वनि-कंपन ब्रह्मांड के आवरण को भेदकर वैकुंठ लोकों में सुनाई दी।
In supreme spiritual ecstasy, he called out to Krishna in a loud voice. The sound vibrations pierced the cosmic veil and were heard in the Vaikuntha realms.
तात्पर्य
श्री अद्वैत आचार्य प्रभु, भगवान विष्णु के पूर्ण अवतार थे, इसलिए उनके महान प्रयास और प्रभाव के कारण कृष्ण के नामों का उनका जप भोग-लोक और भौतिक दुनिया की इंद्रिय धारणा से परे निकल गया और विष्णु के परम निवास, परावाणी वैकुंठलोक में प्रतिध्वनित हुआ, जो शुद्ध अच्छाई से बना है। इस ब्रह्मांड में चौदह ग्रह प्रणालियाँ हैं, जिनमें से महर्लोक, जनलोक, तपलोक और सत्यलोक तीनों लोकों के शीर्ष पर स्थित हैं। श्री अद्वैत आचार्य प्रभु ने कृष्ण के नामों का जप कर भगवान हरि की सेवा में लीन हो गए, जो प्रकृति के भौतिक मोड से पैदा हुए इन ग्रहों से परे था और वैकुंठ के पारलौकिक क्षेत्र में प्रवेश कर गया था, जो सभी चिंताओं से मुक्त है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥