ज्ञान-भक्ति-वैराग्येर गुरु मुख्यतर
कृष्ण-भक्ति वाखानिते येहेन शङ्कर
अनुवाद
श्री अद्वैत आचार्य परम पूजनीय गुरु थे। वे ज्ञान और वैराग्य के साथ भगवान कृष्ण की भक्ति की व्याख्या करने में भगवान शिव के समान ही कुशल थे।
Sri Advaita Acharya was a highly revered guru. He was as skilled as Lord Shiva in explaining devotion to Lord Krishna with wisdom and detachment.
तात्पर्य
ज्ञान-विज्ञान के महान आचार्य, कृष्ण-भक्ति के प्रचारक तथा कृष्ण के अतिरिक्त किसी भी विषय की त्याग-भावना के प्रेरक शिष्य, श्री अद्वैताचार्य ने भगवान की भक्ति की अहैतुकी महत्ता का उपदेश दिया। उन्होंने श्री रुद्र जैसे पवित्र लीलाऐं दिखाईं, जो भक्ति के प्रचार का मुख्य सूत्र तथा विष्णुस्वामी-सम्प्रदाय के संस्थापक हैं। जिस प्रकार शंकर के अवतार श्री शंकराचार्य ने अपने दर्शन, युक्तियों तथा ज्ञान के द्वारा भगवान् की भक्ति को बिखेर दिया था तथा ढंक दिया था ताकि असुर, भ्रमित हो जाऐ, ठीक उसी प्रकार श्री अद्वैत प्रभु ने अपने अद्वितीय उपक्रमों तथा गतिविधियों के द्वारा कृष्ण की भक्ति का वर्णन करते हुए वास्तविक तत्त्व, भक्ति तथा त्याग को प्रदर्शित किया। विष्णुस्वामी के रूप में प्रसिद्ध श्री रुद्र-सम्प्रदाय के आचार्यों की पहचान हुई क्योंकि वे भक्ति की सच्ची शिक्षा देते थे। रुद्र-सम्प्रदाय के कुछ शिष्यों ने अपने आध्यात्मिक गुरु से विमुखता तथा श्रवण के द्वारा ज्ञान प्राप्त करने की प्रक्रिया को त्याग कर भक्ति के लिए मिलावटी प्रक्रिया अपना ली। उन्होंने शिवास्वामी-सम्प्रदाय की स्थापना की। श्री शंकराचार्य इस शिवास्वामी-सम्प्रदाय के रूप में प्रकट हुए तथा उन्होंने पूरे विश्व में मिलावटी भक्ति की जमकर प्रचार किया। चूंकि विशेष बोध से रहित लोगों ने सच्ची तथा मिलावटी भक्ति को एक ही मान लिया, इसलिए वे शाश्वत लाभ प्राप्त करने से वंचित रह गए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥