नितई ना बोलिला मुखे, मजिला संसार-सुखे,
विद्या-कुले कि करिबे तारा।
से सम्बन्ध नाही यारा, वृथा जनम गेलो तारा,
सेई पशु बड़ा दुराचार।
"जो नित्यानंद के नामों का उच्चारण नहीं करते, वे सांसारिक सुखों में फंसे रहते हैं। ऐसे व्यक्ति के लिए विद्या या तथाकथित शैक्षणिक शिक्षा और कुल या महान परिवार या महान राष्ट्र में जन्म का क्या लाभ है? जिसका नित्यानंद से कोई संबंध नहीं, वह केवल अपने मानवीय जीवन को बरबाद कर रहा है। ऐसे व्यक्ति बेलगाम जानवरों के समान हैं।"
