श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  1.2.74 
’কেমনে এই জীব-সব পাইবে উদ্ধার!
বিষয-সুখেতে সব মজিল সṁসার
’केमने एइ जीव-सब पाइबे उद्धार!
विषय-सुखेते सब मजिल सꣳसार
 
 
अनुवाद
[उन्होंने सोचा:] "इन लोगों का उद्धार कैसे होगा? सारा संसार तो केवल भौतिक भोगों में लीन है।
 
[He thought:] "How will these people be saved? The whole world is absorbed only in material enjoyments.
तात्पर्य
वे कैसे जो ख़तरे का सामना कर रहे हैं शाश्वत लाभ पाएंगे? भक्तों के दिल करुणा से भरे हुए थे। उन्होंने समझा कि जो लोग भगवान के विरुद्ध हैं वे आसानी से कामुक आनंद में खो जाते हैं। दूसरे शब्दों में, लोगों ने भौतिक संसार का आनंद अपनी तत्काल स्वार्थ हित और आनंद के रूप में पाया। इसलिए वे भगवान के प्रति भक्ति पूर्ण सेवा को पूरी तरह से भूल गए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)