দম্ভ করি’ বিষহরি পূজে কোন জন
পুত্তলি করযে কেহো দিযা বহু-ধন
दम्भ करि’ विषहरि पूजे कोन जन
पुत्तलि करये केहो दिया बहु-धन
अनुवाद
कुछ लोग गर्व से सर्पों की देवी विषहरी की पूजा करते थे, तथा अन्य लोग मूर्ति पूजा पर बहुत धन खर्च करते थे।
Some people proudly worshipped Vishhari, the goddess of snakes, and others spent a lot of money on idol worship.
तात्पर्य
साधारण लोग विशेषरूप से समृद्ध व्यापारी समुदाय मनसा देवी (विषहारी का एक अन्य नाम) की पूजा के लिए अपव्ययपूर्वक धन खर्च करते थे। उन्होंने सम्पूर्ण ब्राह्मण और पंडित समुदाय को खरीद लिया था और उन्हें अपने नियंत्रण में रखा हुआ था। वे अर्धदेवों और देवियों की विभिन्न प्रकार की मूर्तियाँ और देवता बनाते थे और दान में बड़ी रकम दान करते थे। आज भी रास यात्रा के समय विभिन्न प्रकार की मूर्तियाँ बनाने की प्रथा प्रचलित है। आध्यात्मिक मंच पर सर्वोच्च प्रभु की सेवा करने के बजाय वे मूर्ति पूजा प्रणाली का पालन करते थे और त्यौहारों पर भारी मात्रा में धन व्यय करते थे। बाद में वे इन मूर्तियों को पानी में विसर्जन कर देते थे और अपनी पूजा की क्षणभंगुर प्रकृति और पूजा की वस्तु साबित करते थे। चूँकि वे व्यर्थ उद्देश्यों पर बड़ी रकम खर्च करते थे, बंगाल में श्री जगन्नाथदेव जैसे देवताओं की पूजा विरले ही पाई जाती थी। दूसरी पंक्ति का एक अन्य पठन पुत्तली विभा दिते देया बहु-धन है, जो बताता है कि भौतिक आनंद से पागल लोग पुरुष और स्त्री बंदरों, बिल्लियों और गुड़ियों के बीच विवाह समारोहों में व्यर्थ और गर्वपूर्वक धन व्यय करते थे। इस तरह उन्होंने प्रभु के प्रति अपना घृणाभाव बढ़ाया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥