श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  1.2.63 
কৃষ্ণ-রাম-ভক্তি-শূন্য সকল সṁসার
প্রথম-কলিতে হৈল ভবিষ্য-আচার
कृष्ण-राम-भक्ति-शून्य सकल सꣳसार
प्रथम-कलिते हैल भविष्य-आचार
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड कृष्ण और बलराम की भक्ति से रहित हो गया और कलियुग के भावी लक्षण युग के प्रारम्भ में ही प्रकट हो गये।
 
The entire universe became devoid of devotion to Krishna and Balarama and the future signs of Kaliyuga became visible at the very beginning of the era.
तात्पर्य
उस काल में भगवान में से विमुखता के रूप में विविध प्रकार का दुर्व्यवहार प्रकट हुआ जिसे कलियुग के अंत में होना था, और सारे ब्रह्मांड में उनकी अभिव्यक्ति होने लगी। सभी लोग यह भूल गए कि बलराम और कृष्ण की सेवा उनका एकमात्र कर्तव्य है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)