श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  1.2.61 
অতএব পডুযার নাহি সমুচ্চয
লক্ষ-কোটি অধ্যাপক,—নাহিক নিশ্চয
अतएव पडुयार नाहि समुच्चय
लक्ष-कोटि अध्यापक,—नाहिक निश्चय
 
 
अनुवाद
इसलिए वहां एकत्रित असंख्य विद्यार्थियों और लाखों शिक्षकों की गिनती कोई नहीं कर सका।
 
Therefore, no one could count the countless students and lakhs of teachers gathered there.
तात्पर्य
विविध ग्रंथों को पढ़ने की सुविधा होने के कारण नवद्वीप में शिक्षकों और छात्रों की असंख्यता थी। समूह शब्द का अर्थ है "संग्रह" या "सभा।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)