श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  1.2.58 
ত্রিবিধ-বযসে এক-জাতি লক্ষ-লক্ষ
সরস্বতী-প্রসাদে সবেই মহা-দক্ষ
त्रिविध-वयसे एक-जाति लक्ष-लक्ष
सरस्वती-प्रसादे सबेइ महा-दक्ष
 
 
अनुवाद
विद्या की देवी सरस्वती की कृपादृष्टि से लाखों बालक, युवा और वृद्ध लोग शास्त्रों में निपुण हो गये।
 
With the blessings of Saraswati, the goddess of learning, millions of children, youth and old people became proficient in the scriptures.
तात्पर्य
'त्रिविध-वयसे' इस शब्द से बच्चों, युवकों और वृद्ध लोगों का बोध होता है। सरस्वती की कृपा से, ये सभी शास्त्रों में निपुण थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)