श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  1.2.54 
নবদ্বীপে হৈব প্রভুর অবতার
অতএব নবদ্বীপে মিলন সবার
नवद्वीपे हैब प्रभुर अवतार
अतएव नवद्वीपे मिलन सबार
 
 
अनुवाद
चूँकि भगवान नवद्वीप में प्रकट होने वाले थे, इसलिए सभी भक्त वहाँ एकत्रित हुए।
 
Since the Lord was about to appear in Navadvipa, all the devotees gathered there.
तात्पर्य
श्री नवद्वीप को पूरे विश्व में सबसे गौरवशाली निवास माना जाता है, क्योंकि एक तरफ, श्री नवद्वीप भगवान के प्रेम की प्रतिमूर्ति श्री गौरसुंदर का जन्मस्थान है और दूसरी ओर, भगवान के असंख्य सहयोगी जो पूरे विश्व को पवित्र करने में सक्षम हैं, वे भी वहां मौजूद थे। चूँकि वृंदावन का अद्भुत, मीठा प्रेम छिपा हुआ था, इसलिए छह गोस्वामी और उनके अनुयायी श्री वृंदावन में रहते थे और श्री गौरसुंदर के आदेश पर भगवान कृष्ण के शाश्वत लीलाओं का प्रसार करते थे। इसी तरह, श्री गौरसुंदर के समय में, कई भक्त विभिन्न स्थानों से श्री नवद्वीप आए और भगवान की कीर्तन लीलाओं में उनकी सहायता की।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)