श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  1.2.53 
নানা-স্থানে অবতীর্ণ হৈলা ভক্ত-গণ
নবদ্বীপে আসি’ সবার হৈল মিলন
नाना-स्थाने अवतीर्ण हैला भक्त-गण
नवद्वीपे आसि’ सबार हैल मिलन
 
 
अनुवाद
यद्यपि भक्तगण विभिन्न स्थानों पर प्रकट हुए, किन्तु वे सभी नवद्वीप में एकत्रित हुए।
 
Although the devotees appeared at different places, they all gathered at Navadvipa.
तात्पर्य
कृपया 32 वे पद की व्याख्या को देखिए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)