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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
»
अध्याय 2: भगवान का अवतरण
»
श्लोक 52
श्लोक
1.2.52
অতএব সর্ব-দেশে নিজ-ভক্ত-গণ
অবতীর্ণ কৈলা শ্রী-চৈতন্য-নারাযণ
अतएव सर्व-देशे निज-भक्त-गण
अवतीर्ण कैला श्री-चैतन्य-नारायण
अनुवाद
इसलिए श्री चैतन्य ने अपने भक्तों को विभिन्न देशों में प्रकट किया।
Therefore Sri Chaitanya manifested himself to his devotees in different countries.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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