श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  1.2.50 
যেই দেশে যৈ কুলে বৈষ্ণব ’অবতরে’
তাঙ্হার প্রভাবে লক্ষ-যোজন নিস্তরে
येइ देशे यै कुले वैष्णव ’अवतरे’
ताङ्हार प्रभावे लक्ष-योजन निस्तरे
 
 
अनुवाद
जिस भी स्थान या परिवार में कोई वैष्णव प्रकट होता है, वहां आसपास के लाखों मील तक के लोगों को मुक्ति मिल जाती है।
 
In whichever place or family a Vaishnava appears, people within a radius of millions of miles around attain liberation.
तात्पर्य
वैष्णव अवतारे शब्दों के स्पष्टीकरण हेतु ३५वें श्लोक की टीका का उल्लेख कर सकते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)