श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 44-45
 
 
श्लोक  1.2.44-45 
গঙ্গা-তীর পুণ্য-স্থান-সকল থাকিতে
’বৈষ্ণব’ জন্মযে কেনে শোচ্য-দেশেতে?
আপনে হৈলা অবতীর্ণ গঙ্গা-তীরে
সঙ্গের পার্ষদে কেনে জন্মযেন দূরে?
गङ्गा-तीर पुण्य-स्थान-सकल थाकिते
’वैष्णव’ जन्मये केने शोच्य-देशेते?
आपने हैला अवतीर्ण गङ्गा-तीरे
सङ्गेर पार्षदे केने जन्मयेन दूरे?
 
 
अनुवाद
गंगा का तट परम पवित्र है। फिर कोई वैष्णव अपवित्र स्थान पर क्यों जन्म लेगा? भगवान गंगा के तट पर प्रकट हुए, तो उनके पार्षद दूर-दूर के स्थानों पर क्यों प्रकट हुए?
 
The banks of the Ganges are supremely sacred. So why would a Vaishnava be born in an impure place? If the Lord appeared on the banks of the Ganges, why did His associates appear in distant places?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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