श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  1.2.41 
মহা-জয-জয-ধ্বনি পুষ্প-বরিষণ
সṁগোপে দেবতা-গণে কৈলেন তখন
महा-जय-जय-ध्वनि पुष्प-वरिषण
सꣳगोपे देवता-गणे कैलेन तखन
 
 
अनुवाद
नित्यानंद के प्रकट होने के समय सभी देवताओं ने गुप्त रूप से पुष्प वर्षा की और “जय! जय!” का जाप किया।
 
At the time of Nityananda's appearance, all the gods secretly showered flowers and chanted "Jai! Jai!"
तात्पर्य
जब श्री नित्यानंद प्रभु प्रकट हुए, तो सभी देवताओँ ने हर्ष में उनकी महिमा का गुणगान किया और उन पर पुष्प वर्षा की। यह घटना केवल प्रत्यक्ष बोध में विश्वास करने वालों की समझ से परे थी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)