श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  1.2.40 
কৃপা-সিন্ধু, ভক্তি-দাতা, শ্রী বৈষ্ণব-ধাম
রাঢে অবতীর্ণ হৈলা নিত্যানন্দ-রাম
कृपा-सिन्धु, भक्ति-दाता, श्री वैष्णव-धाम
राढे अवतीर्ण हैला नित्यानन्द-राम
 
 
अनुवाद
दया के सागर, भक्ति के दाता और समस्त वैष्णवों के आश्रय श्री नित्यानन्द राम राधादेश में प्रकट हुए।
 
Sri Nityananda Rama, the ocean of mercy, the giver of devotion and the refuge of all Vaishnavas, appeared in Radhadesh.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)