पुनः भक्त-सङ्गे प्रभु-पदे नमस्कार
स्फुरुक जिह्वाय गौरचन्द्र अवतार
अनुवाद
मैं पुनः श्री चैतन्य महाप्रभु एवं उनके भक्तों के चरणकमलों में प्रणाम करता हूँ। श्री गौरचन्द्र की कथाएँ मेरी जिह्वा पर प्रकट हों।
I once again offer my respects to the lotus feet of Sri Chaitanya Mahaprabhu and his devotees. May the stories of Sri Gaurachandra be revealed to my tongue.
तात्पर्य
अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की चाह के साथ लेखक पुनः भगवान और उनके सहयोगियों को अपना विनम्र अभिवादन समर्पित करता है और प्रार्थना करता है कि प्रभु गौरासुंदर के अलौकिक लीलाएँ उसकी वाणी से प्रकट हों।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥