श्रील पुंडरीक विद्यानिधि (आचार्यनिधि या प्रेमनिधि), श्री वसुदेव दत्त ठाकुर, और उनके भाई मुकुंद दत्त, चाटी ग्राम ( वर्तमान में छटग्राम के रूप में जाना जाता है) गाँव में प्रकट हुए।
राढ़ देश गंगा नदी के पश्चिमी किनारे पर के स्थानों को दर्शाता है। श्री नित्यानंद प्रभु एकचक्र गाँव, या बीरभूम जिले में वीरचंद्रपुर में प्रकट हुए। श्री सत्यराज खान और श्री रामानंद वसु वर्धमान (बर्दवान) जिले के कुलिन गाँव में प्रकट हुए। श्री मुकुंद, श्री नरहरी, श्री रघुनंद, चिरंजीव, और सुलोचना श्रीखंड में प्रकट हुए। अग्रद्वीप में श्री गोविंद, श्री माधव, श्री वासुदेव घोष, द्विज हरिदास, और द्विज वानिनाथ ब्रम्हाचारी जैसे अनेक भक्त प्रकट हुए।
इस छंद में ओड्र शब्द उतकल का उल्लेख करता है, जो कि उड़ीसा का राज्य है जिसका उल्लेख " ओड्र क्षेत्र [ उड़ीसा] पुरुषोत्तम (भगवान जगन्नाथ) के निवास स्थान के रूप में बहुत प्रसिद्ध है" और " ये चार [सम्प्रदाय] उतकल में कलियुग में सर्वोच्च भगवान पुरुषोत्तम से प्रकट होंगे।" श्री भावनंद राय और उनके बेटे, श्रील रामानंद राय, श्री वानिनाथ, और गोपीनाथ, और श्री शिखी माहीति, श्री माधवी देवी, मुराई माहीति, परमानंद महापात्र, उड़ीसा शिवानंद, प्रतापरुद्र, काशी मिश्र, प्रद्युम्न मिश्र, और अन्य कई भक्त वहाँ प्रकट हुए। ( चैतन्य भागवत, अंत्य खंड, अध्याय 5 देखें)
श्रीहट्ट वर्तमान में असम राज्य में स्थित है जो बंगाल से लगा हुआ है। श्रीवास पंडित, श्रीराम पंडित, श्री चंद्रशेखर आचार्य, श्री जगन्नाथ मिश्र, और श्री अद्वैत प्रभु जैसे कई महान भक्त इस जिले में प्रकट हुए।
पश्चिमे शब्द उस स्थान को इंगित करता है जिसे वर्तमान में त्रिहुत के रूप में जाना जाता है। इस स्थान का संस्कृत नाम तीराबुक्ति है। श्रीपाद परमानंद पूरी और श्री रघुपति उपाध्याय इस स्थान पर प्रकट हुए। वे दोनों श्रील माधवेंद्र पूरीपाद के शिष्य थे और श्रीमान महाप्रभु के बहुत अंतरंग सहयोगी थे।
