श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.2.27 
কলি-যুগে সঙ্কীর্তন-ধর্ম পালিবারে
অবতীর্ণ হৈলা প্রভু সর্ব-পরিকরে
कलि-युगे सङ्कीर्तन-धर्म पालिबारे
अवतीर्ण हैला प्रभु सर्व-परिकरे
 
 
अनुवाद
कलियुग में भगवान संकीर्तन के धार्मिक सिद्धांत को बनाए रखने के लिए अपने पार्षदों के साथ अवतार लेते हैं।
 
In Kaliyuga, the Lord incarnates with His associates to uphold the religious principle of Sankirtana.
तात्पर्य
सज़्कीर्तन शब्द तारक - ब्रह्म के उच्चस्वर में सामूहिक मंत्रोच्चारण को संदर्भित करता है, वे पवित्र नाम जो एक को बचाते हैं। तारक - ब्रह्म नाम में परम प्रभु के साथ किसी व्यक्ति के अटूट संबंध का ज्ञान निहित होता है। प्रभु का पवित्र नाम एक फूल की कली के समतुल्य होता है; पवित्र नाम से प्रभु का स्वरूप, गुण, सहयोगी और लीलाएँ धीरे -धीरे प्रकट होती हैं। इसी कारण नामाचार्य श्री ठाकुर हरिदास जी हमेशा सभी के कल्याण के लिए तारक - ब्रह्म महा - मंत्र का कीर्तन करते थे। जिन लोगों ने श्री गौरसुंदर के पारलौकिक कार्यों का अभिलेखन किया है, उन्होंने उद्देश्यपूर्ण रूप से किसी को भी औपचारिक दीक्षा देने की उनकी लीलाओं का वर्णन करने से परहेज किया ताकि कोई भी उन्हें केवल एक "गुरु" के रूप में महिमामंडित न करे जो महा - मंत्र में दीक्षा देता हो। श्री चैतन्य के भक्त इस महा - मंत्र के मंत्रोच्चारण में दीक्षित हैं और हमेशा जोर से या धीरे से एकांत स्थान पर मंत्रोच्चारण करते हैं।

सर्व - परिषद शब्द दर्शाता है कि पाँच प्रकार के कृष्ण भक्तों ने न तो विप्रलंभ के अवतार, श्री गौरसुंदर को माधुर्य - रस की वस्तु माना और न ही उनकी महान लीलाओं में उनके संयोगात्मक कार्यों में उनकी सहायता की; इसके बजाय, वे कृष्ण से उनके अलगाव की भावनाओं को पोषित करते थे, जिससे उन्हें उन भावों को विकसित करने में सहायता मिलती थी। जो लोग गौरसुंदर के हाथों में बाँसुरी या ग्वाला की लाठी रखकर, उन पर एक प्रेमी की मुद्रा थोपकर या उन्हें अर्जुन के सारथी के रूप में मानकर कृष्ण के परम आश्रय की गौर लीलाओं का खंडन करना चाहते हैं, उन्हें कभी भी गौर के साथी या सेवक नहीं माना जा सकता है। कृष्ण की मधुर लीलाओं की कई नारियों ने गौर की लीलाओं में पुरुष शरीर धारण करके गौर के लिए अपनी सेवा का प्रदर्शन किया है; इसलिए बाहरी रूप और गतिविधियाँ परम प्रभु की उनकी सेवा में अप्रासंगिक हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)