श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 225
 
 
श्लोक  1.2.225 
দশ-দিকে ধায, লোক নদীযায
বলিযা উচ্চ ’হরি’ ’হরি’ রে
মানুষে দেবে মেলি’, একত্র হঞা কেলি,
আনন্দে নবদ্বীপ পূরি রে
दश-दिके धाय, लोक नदीयाय
बलिया उच्च ’हरि’ ’हरि’ रे
मानुषे देवे मेलि’, एकत्र हञा केलि,
आनन्दे नवद्वीप पूरि रे
 
 
अनुवाद
नदिया के लोग जोर-जोर से “हरि! हरि!” का जाप करते हुए दसों दिशाओं में दौड़ते हैं। देवता और मनुष्य एक साथ मिल जाते हैं, और पूरा नवद्वीप आनंद से भर जाता है।
 
The people of Nadia ran in all directions, loudly chanting "Hari! Hari!" Gods and humans joined forces, and all of Navadvipa was filled with joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)