कलियुग का धार्मिक सिद्धांत भगवान के पवित्र नामों का सामूहिक जप है। श्री शचीनंदन इस सिद्धांत को स्थापित करने के लिए अवतार लेते हैं।
The religious principle of Kaliyuga is the congregational chanting of the holy names of the Lord. Sri Sachinandan incarnates to establish this principle.
तात्पर्य
सत्ययुग में ध्यान की प्रक्रिया द्वारा, त्रेता युग में अग्नि बलिदान द्वारा, द्वापर युग में प्रभु की पूजा द्वारा, और कलियुग में भगवान हरि के नामों के सामूहिक जप द्वारा जीवित प्राणियों का उद्धार किया जाता है। भगवान श्री शची नंदन इस सामूहिक जप का प्रचार करने के लिए इस दुनिया में प्रकट हुए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥