श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 209
 
 
श्लोक  1.2.209 
রাহু-কবলে ইন্দু, পরকাশ নাম-সিন্দু,
কলি-মর্দন বাজে বাণা
পহুঙ্ ভেল পরকাশ, ভুবন চতুর্-দশ,
জয জয পডিল ঘোষণা
राहु-कवले इन्दु, परकाश नाम-सिन्दु,
कलि-मर्दन बाजे बाणा
पहुङ् भेल परकाश, भुवन चतुर्-दश,
जय जय पडिल घोषणा
 
 
अनुवाद
जब राहु ने चन्द्रमा को ढक लिया, जब पवित्र नामों का सागर प्रकट हो गया, जब कलि का दमन हो गया और जब विजय की ध्वजा फहराई गई - उस समय परमेश्वर प्रकट हुए और चौदह लोक “जय! जय!” की ध्वनि से भर गए।
 
When Rahu covered the moon, when the ocean of holy names appeared, when Kali was subdued and when the banner of victory was hoisted – at that time the Supreme Lord appeared and the fourteen worlds were filled with the sound of “Jai! Jaya!”
तात्पर्य
जब सूर्य और चंद्रमा अपनी कक्षाओं में एक-दूसरे के ठीक विपरीत होते हैं, तो उनकी छायाएँ राहु और केतु बनाती हैं। जब सूर्य और चंद्रमा एक दूसरे से छह राशियों या घराने दूर होते हैं, या जब वे 180 डिग्री पर होते हैं, तो इस ग्रह के निवासी पृथ्वी की छाया को चंद्रमा पर गिरते देखते हैं। इस छाया को राहु कहा जाता है। जब सूर्य को चंद्रमा की छाया से ढका जाता है तो कहा जाता है कि वह राहु या केतु द्वारा ग्रहण किया गया है। चंद्र ग्रहण के समय भी पृथ्वी की छाया को राहु कहा जाता है। कवल शब्द का अर्थ है "निगला हुआ"। चंद्र ग्रहण के समय, या राहु द्वारा चंद्रमा के निगलने पर, लोग भगवान के पवित्र नामों का जप करते हैं और काली पर विजय का ध्वज फहराते हैं। पाहुँ शब्द का अर्थ "भगवान" है, और भेला शब्द का अर्थ "बन गया" है। चौदह लोक सात ऊपरी ग्रहों- भूर, भुवः, स्वः, महः, जनः, तपः और सत्य- और सात निचले ग्रहों- अतल, विलता आदि से मिलकर बने हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)