श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 207
 
 
श्लोक  1.2.207 
চতুর্-দিকে পুষ্প-বৃষ্টি করে দেব-গণ
’জয’-শব্দে দুন্দুভি বাজযে অনুক্ষণ
चतुर्-दिके पुष्प-वृष्टि करे देव-गण
’जय’-शब्दे दुन्दुभि बाजये अनुक्षण
 
 
अनुवाद
देवताओं ने सभी दिशाओं में पुष्प वर्षा की और नगाड़े बजाते हुए “जय! जय!” का जाप किया।
 
The gods showered flowers in all directions and beat drums, chanting "Jai! Jai!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)