श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 205
 
 
श्लोक  1.2.205 
কিবা শিশু, বৃদ্ধ, নারী, সজ্জন, দুর্জন
সবে ’হরি’ ’হরি’ বোলে দেখিযা ’গ্রহণ’
किबा शिशु, वृद्ध, नारी, सज्जन, दुर्जन
सबे ’हरि’ ’हरि’ बोले देखिया ’ग्रहण’
 
 
अनुवाद
चाहे युवा हो, वृद्ध हो, स्त्री हो, धर्मात्मा हो या अधर्मी हो - हर कोई ग्रहण देखते हुए हरि नाम का जप करने में लगा हुआ था।
 
Be it young, old, woman, virtuous or unrighteous – everyone was busy chanting the name of Hari while watching the eclipse.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)