श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 195
 
 
श्लोक  1.2.195 
শচী-গর্ভে বৈসে সর্ব-ভুবনের বাস
ফাল্গুনী পূর্ণিমা আসি’ হৈল প্রকাশ
शची-गर्भे वैसे सर्व-भुवनेर वास
फाल्गुनी पूर्णिमा आसि’ हैल प्रकाश
 
 
अनुवाद
भगवान्, जो समस्त ब्रह्माण्डों के आश्रय हैं, शचीदेवी के गर्भ में तब तक रहे जब तक कि धीरे-धीरे फाल्गुनी पूर्णिमा निकट नहीं आ गई।
 
The Lord, who is the shelter of all the universes, remained in the womb of Sachidevi until the Phalguni Purnima gradually approached.
तात्पर्य
सुप्रीम लॉर्ड, जो अनगिनत वैकुण्ठ ग्रहों और चौदह ग्रह प्रणालियों से बने भौतिक ब्रह्मांडों का विश्राम स्थल है, वह शची के गर्भ में प्रकट हुआ है। भगवान फाल्गुन मास की पूर्णिमा रात्रि तक शची के गर्भ में रहे, वर्ष 1486। शची-गर्भ-सिन्धु शब्द शुद्ध भलाई के रूप को संदर्भित करता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)