श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 193
 
 
श्लोक  1.2.193 
নবদ্বীপ-প্রতিও থাকুক নমস্কার
শচী-জগন্নাথ-গৃহে যথা অবতার
नवद्वीप-प्रतिओ थाकुक नमस्कार
शची-जगन्नाथ-गृहे यथा अवतार
 
 
अनुवाद
"अतः हम श्री नवद्वीप को सादर प्रणाम करते हैं, जहाँ भगवान शचीदेवी और जगन्नाथ के घर में प्रकट हुए थे।"
 
"So we offer our respectful obeisances to Sri Navadvipa, where the Lord appeared in the home of Shachidevi and Jagannatha."
तात्पर्य
"हम आपके कमल चरणों को प्राप्त करने के योग्य आवास को नमन करते हैं।" वह निवास दुर्गा, या नीला से भिन्न नहीं है, जो नारायण की ऊर्जा का प्रकटन है और सभी भक्तों द्वारा पूजनीय है। वह योगपीठ, जो श्री मायापुर में स्थित है, शची और जगन्नाथ के घर का स्थल है, जिसमें भगवान ने जन्म लिया था। दूसरे शब्दों में, श्री नवद्वीप-धाम शुद्ध अच्छाई से बना है और वृंदावन से भिन्न नहीं है। यह उन भक्तों के लिए नौ प्रकार की भक्ति सेवा का आधार है जिन्होंने आध्यात्मिक गुरु का आश्रय लिया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)